होली के हुडदंग के साथ आज फगुआ भी अपनें चरम पर पहुंच गया .आज से ही चैत मॉस का आरम्भ हो गया।
गांव में फाग गायकों की टोली अभी आठ दिन तक धमाल मचाती रहेगी,जिसे आठो चैता के नाम से जाना जाताहै। आठो चैता के समापन के साथ ही फागुन के यह दिन चार बीत जायेंगे,फिर से अगले बरस आने के लिए।
आज गांव में भी फाग गायन मंडली जगह -जगह जमीं और एक बैठकी सदा की तरह मेरे घर पर भी हुई ।
जिसमें गाँव के पारम्परिक गवैयों के साथ घर के सभी सदस्य सम्मिलित हुए ,कुछ बानगियाँ आपके लिए भी ।
पहली प्रस्तुति चैता की है जो कि चैत मॉस आरम्भ होने के स्वागत में गाया गया है .प्रस्तुत चैता एक विरहणी की पीड़ा को मुखर स्वर देता है,आमों में बौर आ गये हैं ,कोयल बोलनें लगी है ,सखी सहेलियाँ अपनें बच्चों से खेल रहीं हैं,उलाहना यह कि विरहणी का प्रियतम अभी भी उससे दूर है.विरह की यह मार्मिक पीड़ा इस गीत में कैसे भाव -बद्ध हुई है ,आनंद उठाइए----
दूसरी प्रस्तुत उलारा कही जाती है जो कि फाग गीत के अंत में प्रायः गाया जाता है ,इसमें हर्षो उल्लास के माहौल मेंनई नवेली के पाँव में पायल ,कमर की करधन ,नाक में पहनने वाली झुलनी आदि आभूषणों को परिवार मेंकौन-कौन नई नवेली के लिए बनवाता है ,इसका उल्लेख किया गया है-----
और अंत में संगीतकारों ,सुनवैयों और गवैयों के चतुर्दिक शुभ कामना से ओतप्रोत गीत ''सदा '' का भी आस्वादनकीजिये ------
काव्य रसज्ञ पं. भवानी प्रसाद तिवारी चचा लुक़्मान की दृष्टि में
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(पद्दमश्री स्व. पं भवानी प्रसाद तिवारी के सौवें जन्म दिवस पर विशेष)
दर्द उनका, अश्क बनकर, वाँ गिरा वो काँ मिला ?
ढूंढते तो सब रहे पर, आख़िर हमको याँ मिला ...
3 महीने पहले





बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
प्रत्युत्तर देंहटाएंढेर सारी शुभकामनायें.
संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोली पर आपकी बेहतर रचना और होली, दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं....आपका स्नेहाकांक्षी ....www.sansadji.com
प्रत्युत्तर देंहटाएं--------आपनें तो समाँ बाँध दिया है ,सारी की सारी पोस्ट संग्रह करनें योग्य बन गयी है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकमाल की पोस्ट -----यही फायदा है जब आप जैसा व्यक्ति समस्त संसाधनों के साथ गांव में रह कर जन सेवा में सक्रिय हो तो ऐसी ही पोस्ट पढनें को मिला करेगी ,वर्ना यहाँ शहर मेंकहाँ है यह सुख .-------
बहुत सुंदर जी, होली की बधाई
प्रत्युत्तर देंहटाएंमस्त है.
प्रत्युत्तर देंहटाएं----अरे मैं तो आपको होली के मुबारकबाद देना भूल ही गयी.
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोली क़ी बहुत शुभकामना.----
आनंददायक प्रस्तुतियाँ। इन सब आयोजनों के चित्र भी होते तो और आनंद मिलता।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुति .. गांव का माहौल आंखें के सामने आ गया .. सपरिवार आपको होली की शुभकामनाएं !!
प्रत्युत्तर देंहटाएंगाने इतने अच्छे हैं कि क्या कहा जाय ; लोग मुबारकबाद देना भी भूल जा रहे हैं !
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाकही आपकी श्रमसिद्ध पोस्टों ने आपको सजग अवधी - प्रेमी साबित कर दिया है !
इतना भरोसा बनता है कि अब कुछ गीत तर्ज के साथ बने रहेंगे , हमारे साथ , क्योंकि
आप है न इस कार्य के लिए तत्पर !
अरे हम भी पछलग्गू की तरह आपके साथ आ जायेंगे , आपकी हौसला - अफजाई में !!!
वाह वाह वाह पंडितजी क्या ही ख़ूबसूरत गीत सुनवाए जी। होली का आनंद दुगुना हो गया। बहुत बहुत आभार इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी रचना बहुत ही बढ़िया लगी , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअह्हा!! आनन्द आ गया.....इस बार की होली आपने बनवा दी...वाह!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंभाई मज़ा आ गया मनोज जी .... बस मज़ा आ गया.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमनोज जी इसे ही तो कहते हैं सार्थक ब्लॉग्गिंग!
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप ने इन लोकगीतों से और इन के प्रकारों से परिचय कराया जिनके बारे में मुझे तो पहले नहीं मालूम था.
सामयिक प्रस्तुति है.साथ ही इनका अनूठा अनमोल संग्रह भी बन गया है.
आप का आभार .
१-चैता -बहुत ही बढ़िया लगा ..
बहुत ही सुन्दर गाया है और सुनने में बेहद आनंद आया...ढोलक तो बहुत ही बढ़िया / 'क्रिस्प' बजी है!
आश्चर्य होता है कितना हुनर है इन गुमनाम कलाकारों में !
मंझी हुई आवाज़ और बस एक साज़[ढोलक ]से ही पूरा समा बाँध देते हैं !
२-उलारा की मस्ती सुनते ही बनती है..बहुत ही बढ़िया !
३-'सदा 'मनमोहना गोविंदा के लिए गाया गया है .. अद्भुत प्रस्तुति.
संगीत प्रेमियों के लिए होली की इस भेंट के लिए धन्यवाद .
बेहतरीन प्रस्तुती। आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें
प्रत्युत्तर देंहटाएंwaha kya gaya hai aapne.
प्रत्युत्तर देंहटाएंaap ka studio bhi ab to dekhana hoga...........
आज न जाने क्या हुआ है कि प्लेयर ही नहीं दिख रहे मुझे कि सुनूँ ! कई बार रिफ्रेश कर चुका हूँ पेज !
प्रत्युत्तर देंहटाएंटिप्पणियों का मोद देखकर न सुन पाने की व्यथा का क्या कहूँ !
फिर-फिर आता हूँ ।
कल नहीं सुन पाया । आज सुना और आनंद आ गया , भाई जी।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअरे वाह !
प्रत्युत्तर देंहटाएंबरसों बाद फाग गीत सुने हैं आनंद आ गया , आपकी यह मेहनत एक धरोहर साबित होगी आधुनिक पीढी के लिए ! आपकी टिपण्णी का जवाब अपने ब्लाग पर ही दिया है, समय मिले तो एक बार और आयें !
होली की शुभकामनाओं के साथ इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिये आभार ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi sandar faag geet..
प्रत्युत्तर देंहटाएंaapne bahut accha kaam kiya hai...
ab ye hamesha ke liye rahega...
बहुत बढ़िया लगा! बड़े ही सुन्दरता से आपने प्रस्तुत किया है जो प्रशंग्सनीय है!
प्रत्युत्तर देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंsunder rachna
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi badhiya geet hai ,happy holi
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी पोस्ट पर देर से आया हूं पर रस पूरा पाया धन्यवाद
प्रत्युत्तर देंहटाएंwah...maza aa gaya manoj ji. samyik prastuti..
प्रत्युत्तर देंहटाएंहोली बीत गई, पर उसका रंग नहीं उतरता. लाजवाब...!!
प्रत्युत्तर देंहटाएं____________________
'शब्द-शिखर' पर पढ़ें 'अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस' पर आधारित पोस्ट. अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस के 100 साल पर बधाई.
ये भी सुनलिये! मजेदार!
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