सोमवार, 15 मार्च 2010

तमसा तट से............




इधर कई दिनों से मैं फैजाबाद एवं राजा श्री राम चन्द्र जी की नगरी अयोध्या में रहा .यह क्षेत्र तो वैसे हमारे प्रिय श्री अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी जी का है पर उनके इलाके की खबर मुझे देनी पड़ रही है . व्यस्तता इतनी थी कि ब्लाग जगत से न चाहते हुए भी दूर रहना पड़ा .यहाँ बाकी सब तो पूर्ववत ही लगा लेकिन तमसा नदी का हाल देख मन बहुत दुखी है, वह आज विलुप्त होने के कगार पर है और कोई उसकी सुधि लेने वाला नहीं है..मैं उसी तमसा की बात कर रहा हूँ जिसके तट पर कभी श्री राम चन्द्र जी नें एक रात बनवास प्रारंभ होने पर बिताई थी .इस नदी का उल्लेख गोस्वामी तुलसी दास जी नें श्री राम चरित मानस के अयोध्या काण्ड में दोहा संख्या ८४ में इस तरह दिया है-
बालक वृद्ध बिहाई गृह लगे लोग सब साथ|
तमसा तीर निवासु किय प्रथम दिवस रघुनाथ||
इस नदी की वेगवती धाराओं का उल्लेख श्री वाल्मीकि कृत रामायण के अयोध्याकाण्ड में पैतालिसवें और छियालिसवें सर्ग में भी पढने को मिलता है क़ि किस तरह नदी की तिरछी धारा राघव को बन गमन हेतु बाधा बन रही थी.
इन चित्रों में, इस विलुप्त होती ऐतिहासिक नदी का हाल देखिये.....










इस समय में ब्लाग जगत से दूरी के लिए अफ़सोस है,बस एक दो दिनों में फिर से नियमित हो पाउँगा ...
बाकी अयोध्या से कुछ और.. अगली पोस्ट में.......

26 टिप्‍पणियां:

  1. सभी नदियों का यही हाल दिख रहा है ....जिम्मेदार भी हम सभी हैं इस हालात के

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  2. यही तो परेशानी है अपनी धरोहर की ही कदर नहीं हमें.

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  3. आज सभी अपने स्‍वार्थ में अंधे हैं .. हमारे प्राकृतिक संसाधनों की शक्ति को आज लोग बिल्‍कुल महत्‍व नहीं दे रहे हैं .. जल्‍द इनकी दशा को सुधारे जाने के प्रयास होने चाहिए !!

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  4. तमसा के किनारे ही रामयाण के प्रणयन की प्रेरणा महर्षि वाल्मिकी को मिली थी -जो दृश्य दिख रहा है बहुत दुखद है -यह भौगोलिकता का ही नहीं एक संस्कृति के अवसान का भी काल आ पहुंचा है -और रंजना जी ठीक कह रही हैं यही हाल तो कमोबेस सभी नदियों का है!

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  5. आपने सही मुद्दे को लेकर बखूबी शब्दों में पिरोया है! देखकर बहुत दुःख होता है कि हमारे देश में सारे धरोहर की इतनी बुरी हालत है की देखा नहीं जा सकता!

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  6. तमसा नदी का हाल तो सचमुच बहुत बुरा दिखाई दे रहा है।

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  7. नदियां तो इसी तरह से विलुप्पत हो जाती है, कुछ प्राकृतिक कारणों से और कुछ मानव श्रम से ।

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  8. तस्वीरें बता रही हैं कि स्थिति चिंताजनक है.
    आशा है विलुप्त होती इस नदी की ओर जल्द ही प्रशासन का ध्यान जाएगा और कुछ ठोस कदम उठाए जाएँगे. अंतरजाल पर इस जानकारी
    को लाने और जनमानस का ध्यान खींच कर इस की सुरक्षा के लिए एक कदम आप ने भी बढ़ाया है.
    इस जानकारी के लिए आभार.

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  9. जब घरो मै पानी नही आता तो हम चीखते है, सरकार पर दोष देते है.... ओर नदियो को नाले का रुप कोन देता है? आज भारत की सारी नदियो का यही हाल है

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  10. मनोज जी प्राकृतिक देन नदियों की यह हालत बहुत सोचनीय हो गयी है..

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  11. वाकई बदतर हालत है और यही हाल ज्यादातर अन्य देश के हिस्सों में है.

    रामराम.

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  12. जल प्रदूषण फैलाने के लिए हम सभी खुद जिम्मेदार हैं .. नदियों का पानी योग्य भी नहीं रह गया है ...

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  13. लुप्त होती धरोहरों की और ध्यान भी नहीं दिया जा रहा है जिसके मानव को गंभीर परिणाम भविष्य में भुगतने होंगे ....

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  14. वर्ष २००५ में हम भी अयोध्या गए थे. वाकई यह दुखदायी है. सरकारी घोषणाएं बड़ी-बड़ी पर कोई भी गंभीरता नहीं नदियों की सफाई को लेकर. आपकी यह पोस्ट ऑंखें खोलती है.

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  15. सिर्फ तमसा ही क्यों हमारे यहाँ की गोमती का तो इस से भी बुरा हाल है । वाकई यह सोचने का विषय है पर हम कैसे बताये आम जनता को यह की इस से हमारा आज नहीं कल भी बिगड़ जायेगा । तमसा के साथ ही साथ देश की और नदियाँ भी कराह रही है, आखिर उनके दुःख हरता कब आयेंगे ..........

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  16. अपनी राम नगरी पर पढ़कर बड़ा अच्छा लगा ,
    स्थिति सोचनीय है ..
    तमसा तो एक प्रतीक है भविष्य की बहुत सी 'तमसाओं' का ..
    सरकार से उम्मीद रखना बेकार है ..
    ............. अयोध्या पर अन्य प्रविष्टियों की प्रतीक्षा है ! आभार !

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  17. aadarniy sir main bhi aapki baato se sahmat hun aaj dhindhorato sabhi pitte hai jaane kitane rupye bhi ghoshhit ho jaate hai fir bhi kaam ke naam par kuchh nahi hota.
    poonam

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  18. बहुत अच्छी प्रस्तुती। धन्यवाद । मै भी अगले हफ्ते कुछ दिन दूर हो जाऊँगी नेट से ब्लाग पर न आ सकी तो बुरा मत मानें । जल्दी वापिस आऊँगी। धन्यवाद्

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  19. tamsa nadi ke saath aur nadiyon ke bhi aese haal hai, behaal .jise dekh dukh hi hota hai ,sundar post .yojnaye sab dhari rah jaati .

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  20. कभी कभी ऐसी दूरी बना लेनी चाहिए। अगली जानकारी भरी पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी।

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  21. प्रासंगिक प्रविष्टि ! अरविन्द जी ने सही कहा, "यह भौगोलिकता का ही नहीं एक संस्कृति के अवसान का भी काल आ पहुंचा है" ।
    आभार ।

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