डार द्रुम पलना, बिछौना नवपल्लव के,
सुमन झ्रगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झुलावै केकी कीर बहरावै देव,
कोकिल हलावै हुलसावै कर तारी दै
पूरित पराग सों उतारो करै राई लोन,
कंजकली नायिका लतानि सिर सारी दै।
मदन महीप जू को बालक बसंत, ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै||
वसंत के साथ ही फिर हम सब की ओर ग्राम्यांचल में शुरू होगा फाग गायन का धमाल.
एक सामयिक तथा आंचलिक लोक-गीत(अब लगभग विलुप्त )के बोल देखिये जिसमें नायिका तरह-तरह की उपमाओं के जरिये अपनें प्रिय को परदेश जाने से रोक रही है क्योंकि फागुन आने वाला है. ...........
फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने
देखहूँ कचनार फुलाने ,दिन अधिक-अधिक अधिकाने
बन बिच कोयल शोर मचावे,ऋतु पति आगमन जनावे-कंत जनि करहूँ विदेश पयाने
सब नारि श्रृंगार बनावे,अपने पिय संग मोद मचावे
गावै होली सहित धमारी-चैती -चहका-बेलवाई- कंत जनि करहूँ विदेश पयाने..
फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने .....
अब आप भी सतर्क हो जाएँ क्योंकि फागुनी हवा का झोंका आपको भी व्यथित करने वाला है........





बसंत, डिप्रैश्न के प्रेमियों के लिए बड़ी भयावह वेला है
प्रत्युत्तर देंहटाएंऋतुराज वसंत का स्वागत सबसे पहले आपने ही किया है ! बधाई !
प्रत्युत्तर देंहटाएंकाजल कुमार के कमेन्ट हमेशा जानदार होते हैं, पढ़कर बरबस मुस्कान आ गयी ....सच तो है !
वे वाकई बदकिस्मत हैं जिन्हें वसंत भी अच्छा नहीं लगता !
शुभकामनायें !
मनोज जी सुंदर कविता का रसास्वादन कराके आपने वासंती व्यार बहाई है, ऋतुराज वसंत का स्वागत. शत शत बधाइयाँ.
प्रत्युत्तर देंहटाएंAchha Agaj hai..
प्रत्युत्तर देंहटाएंअब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
प्रत्युत्तर देंहटाएंचुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
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फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने .....
प्रत्युत्तर देंहटाएंsahee hai-fagun aa gya.
जब तक गिरिजेश जी मौन न तोड़े फागुन कैसे अ सकता है ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंदेव की कविताई के क्या कहने !
बहुत सुंदर जी, लेकिन हमारे यहां तो अभी बर्फ़ ही बर्फ़ हे.... धन्यवाद
प्रत्युत्तर देंहटाएंइधर मुंबई में अभी थोड़ी थोड़ी बसंती सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पीपल के पत्ते कुछ नये नये से....एक तरह की लालिमा लिये दिखने लगे हैं।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहमें तो बसंत बहुत सुहाता है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंपीली पीली सरसों के खेत देखकर मन मयूर बन जाता है ।
बसन्त के आगमन पर बेहतरीन प्रस्तुति ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर कविता का रसास्वादन कराके आपने वासंती व्यार बहाई है|ऋतुराज का स्वागत|
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|
सुन्दर कविता। हमे तो कोई खतरा नही सावण हरे न भादों सूखे। बधाई इस रचना के लिये।
प्रत्युत्तर देंहटाएंलो जी बात की बात में देखते देखते बसंत आ पहुंचा और हम अब तक सो ही रहे हैं. करते हैं अब जल्दी से डिप्रेसन में भेजने की तैयारी.:)
प्रत्युत्तर देंहटाएंरामराम.
बसंत की तरह ही अलंकृत रचना है ......सुंदर शाब्दिक अलंकरण प्रभावित करता है.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंखुबसूरत कविता के साथ वसंत का स्वागत......शुभकामनाये
प्रत्युत्तर देंहटाएंregards
ऋतुराज का स्वागत|
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|
वाह! अब दिखा वसंती रंग!
प्रत्युत्तर देंहटाएंऋतुराज का हार्दिक अभिनंदन।
प्रत्युत्तर देंहटाएं---------
समाधि द्वारा सिद्ध ज्ञान।
प्रकृति की सूक्ष्म हलचलों के विशेषज्ञ पशु-पक्षी।
ऋतुराज के स्वागत का मोहक अंदाज़ !
प्रत्युत्तर देंहटाएंबसंत पर लिखी एक मनोहारी प्रस्तुति .
प्रत्युत्तर देंहटाएं.........................
आप की आज वैवाहिक वर्षगांठ है.हमारी तरफ़ से ढेरों हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ!