शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

स्वागत वसंत..........

आगामी ८ फरवरी को वसंत पंचमी है .रीतिकाल के प्रतिनिधि महा कवि देव के वसंत पर व्यक्त मनोभावों को दृष्टिगत रखते हुए आने वाले पूरे (फागुन)महीने का स्वागत किया जाय---
डार द्रुम पलना, बिछौना नवपल्लव के,
सुमन झ्रगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झुलावै केकी कीर बहरावै देव,
कोकिल हलावै हुलसावै कर तारी दै
पूरित पराग सों उतारो करै राई लोन,
कंजकली नायिका लतानि सिर सारी दै।
मदन महीप जू को बालक बसंत, ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै||


वसंत के साथ ही फिर हम सब की ओर ग्राम्यांचल में शुरू होगा फाग गायन का धमाल.
एक सामयिक तथा आंचलिक लोक-गीत(अब लगभग विलुप्त )के बोल देखिये जिसमें नायिका तरह-तरह की उपमाओं के जरिये अपनें प्रिय को परदेश जाने से रोक रही है क्योंकि फागुन आने वाला है. ...........

फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने

देखहूँ कचनार फुलाने ,दिन अधिक-अधिक अधिकाने

बन बिच कोयल शोर मचावे,ऋतु पति आगमन जनावे-कंत जनि करहूँ विदेश पयाने
सब नारि श्रृंगार बनावे,अपने पिय संग मोद मचावे
गावै होली सहित धमारी-चैती -चहका-बेलवाई- कंत जनि करहूँ विदेश पयाने..
फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने .....


अब आप भी सतर्क हो जाएँ क्योंकि फागुनी हवा का झोंका आपको भी व्यथित करने वाला है........

21 टिप्‍पणियां:

  1. बसंत, डिप्रैश्न के प्रेमियों के लिए बड़ी भयावह वेला है

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  2. ऋतुराज वसंत का स्वागत सबसे पहले आपने ही किया है ! बधाई !
    काजल कुमार के कमेन्ट हमेशा जानदार होते हैं, पढ़कर बरबस मुस्कान आ गयी ....सच तो है !
    वे वाकई बदकिस्मत हैं जिन्हें वसंत भी अच्छा नहीं लगता !
    शुभकामनायें !

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  3. मनोज जी सुंदर कविता का रसास्वादन कराके आपने वासंती व्यार बहाई है, ऋतुराज वसंत का स्वागत. शत शत बधाइयाँ.

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  4. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
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  5. फागुन के दिन नियराने कंत जनि करहूँ विदेश पयाने .....
    sahee hai-fagun aa gya.

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  6. जब तक गिरिजेश जी मौन न तोड़े फागुन कैसे अ सकता है ?
    देव की कविताई के क्या कहने !

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  7. बहुत सुंदर जी, लेकिन हमारे यहां तो अभी बर्फ़ ही बर्फ़ हे.... धन्यवाद

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  8. इधर मुंबई में अभी थोड़ी थोड़ी बसंती सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पीपल के पत्ते कुछ नये नये से....एक तरह की लालिमा लिये दिखने लगे हैं।

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  9. हमें तो बसंत बहुत सुहाता है ।
    पीली पीली सरसों के खेत देखकर मन मयूर बन जाता है ।

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  10. बसन्‍त के आगमन पर बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  11. सुंदर कविता का रसास्वादन कराके आपने वासंती व्यार बहाई है|ऋतुराज का स्वागत|

    आप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  12. सुन्दर कविता। हमे तो कोई खतरा नही सावण हरे न भादों सूखे। बधाई इस रचना के लिये।

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  13. लो जी बात की बात में देखते देखते बसंत आ पहुंचा और हम अब तक सो ही रहे हैं. करते हैं अब जल्दी से डिप्रेसन में भेजने की तैयारी.:)

    रामराम.

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  14. बसंत की तरह ही अलंकृत रचना है ......सुंदर शाब्दिक अलंकरण प्रभावित करता है.....

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  15. खुबसूरत कविता के साथ वसंत का स्वागत......शुभकामनाये
    regards

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  16. ऋतुराज का स्वागत|

    आप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  17. ऋतुराज के स्वागत का मोहक अंदाज़ !

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  18. बसंत पर लिखी एक मनोहारी प्रस्तुति .
    .........................
    आप की आज वैवाहिक वर्षगांठ है.हमारी तरफ़ से ढेरों हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे ब्लॉग जीवन लिए प्राण वायु से कमतर नहीं ,आपका अग्रिम आभार एवं स्वागत !