गुरुवार, 30 अक्तूबर 2008

नमन इंदिरा (३१ अक्टूबर ,शहादत दिवस पर विशेष )


स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी की आज के दिन ही शहादत हुई थी.विरोध एवं समर्थन के कई एक मुद्दे हो सकते हैं परन्तु मै सदैव सकारात्मक पथ का अनुगामी रहा हूँ ,इस कारण से और वैसे भी स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी एक ऐसी महान नेता थीं ,जिनका समकालीन अथवा प्रायः समकालीन कोई अन्य उदाहरन दिखाई नही देता .
स्व.श्रीमती गांधी का जन्म और लालन पालन उस दौर में हुआ था ,जब देश में स्वतन्र्ता आन्दोलन अपने पूरे उफान पर था ,वह भी एक ऐसा परिवार जिसके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ही देश की आजादी थी. .शायद इसी लिए वह वज्र की बुनियाद ही थी कि हर मुसीबत तथा जीवन के प्रत्येक कठिन दौर में इंदिरा जी और मजबूत होकर उभरीं .बचपन से ही जो हौसला उन्हें विरासत में उन्हें मिला वह महाप्रयाण तक उनके साथ गया ,इंदिरा जी ने जो भी निर्णय जीवन में लिया उसे पूरी दृढ़ता के साथ निभाया भी .दबाव की राजनीति उन्हें कभी रास न आयी .उन्होंने देश को कई अग्नि परिक्छाओ के कठिन दौर से उबारा था . जैसा कि आप में से कई एक लोग जानते है कि उन्होंने नए इतिहास के साथ ही एक नए भूगोल को भी जन्म दिया था .
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य स्व .मोहन अवस्थी जी की इन पंक्तियों को मै आज स्व.श्रीमती गांधी जी के प्रति श्रद्धासुमन के लिए उपयुक्त पा रहा हूँ ,जो कि कवि ने कभी स्वतन्र्ता आन्दोलन में शहीदों के प्रति लिखा था ,जिसमे मजबूत संकल्प को नमन किया गया है ---
थे गरून् निर्बाध गति ,पूछो न उनके हौसले .
बिजलियाँ चुनकर ,बनाये थे उन्होंने घोसले .
देश के आगे ,उन्हें इस देह की परवा न थी .
रोग था ऐसा कहीं ,जिसकी कि प्राप्त दवा न थी .
फूल माला कर दिए ,जो दहकते अंगार थे .
गीत उनके एक थे ,वीभत्स के श्रृंगार के .
जो पहनते बिच्छुओं को,मान मोती की लड़ी.
सांप थे उनके लिए ,केवल टहलने की छड़ी.

9 टिप्‍पणियां:

  1. हर इंसान के अच्छे बुरे पहलु होते हैं ! पर इससे उसका महत्त्व कम नही होता ! और खासकर राजनैतिक लोगो के साथ कई तरह की मजबूरियां भी रहती हैं ! अगर कोई पूर्वाग्रह ना पाला जाए तो वे एक कर्मठ राजनेता थी ! उनके एक दो तथाकथित ग़लत फैसलों को छोड़ दिया जाए तो ऎसी महिला जल्दी से जन्म लेने वाली नही है ! उनको नमन !

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  2. श्रीमती गांधी से आप निरपेक्ष नहीं हो सकते। और उनके साहस का तो सानी न था।

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  3. स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी का समकालीन अथवा प्रायः समकालीन कोई अन्य उदाहरन दिखाई नही देता .
    बिल्‍कुल सही कहा आपने।

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  4. स्वागत है हिन्दी ब्लॉग्गिंग में !

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  5. उनकी तात्कालिक निर्णय लेने की क्षमता बेशक लाजवाब थी !

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  6. उनकी राजनैतिक नीतियों का बहुत बड़ा समर्थक नही हूँ पर हाँ ये मानता हूँ की आज के कई दब्बू राजनेताओं से कही ज्यादा साहसी थी वे .

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  7. ज्ञान जी की बात से सहमत. Whether or not you like her, you can't ignore her.

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  8. तात्कालिक निर्णय लेने की क्षमता बेशक लाजवाब थी.साहसी थी.

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  9. इसी का जिक्र हुआ था चर्चा में! वाह तब आपकी यह शुरुआती पोस्ट थी। वाह! क्या यादें हैं।

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे ब्लॉग जीवन लिए प्राण वायु से कमतर नहीं ,आपका अग्रिम आभार एवं स्वागत !