गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

बस इतना मुझको पयाम दे.......

तूँ न आये कोई गिला नही
मगर अपना हसीन ख्याल दे
मेरी शाम धुंध में कट गयी
मेरी रात को तो संवार दे|

मेरे गम जो हैं ,वो रहेंगे भी
मेरी उम्र कम हो दुआ करो
अभी हूँ मै कल कभी ना रहूँ
मुझे लमहे भर का करार दे|

नही शिकवा है इस बात का
तेरा साथ मुझको न मिल सका
मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
बस इतना मुझको पयाम दे|

(इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डायमंड जुबिली हॉस्टल में अध्ययन के दौरान , समकालीन कई पत्रिकाओं में प्रकाशित ,मेरी एक रचना जिसे मैंने आज की ही तारीख 5 फरवरी 1989 में लिखा था ,ब्लाग जगत से जुड़े शुभेच्छुओं के लिए पुनः दुहरा रहा हूँ .....,आशा है पसंद आयेगी. )

34 टिप्‍पणियां:

  1. तू ना आये कोई गिला नहीं ...बस हसीं ख्याल दे दे ...यहाँ तक तो ठीक था ...उम्र कम करने की दुआ क्यों दे दे .... जियो हजारों साल ....!!

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  2. ----------बहुत बेहतरीन गजल,हर लाइन भाव विभोर कर रही है,मन से लिखी गयी रचना,धन्यवाद --------

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  3. अरे वह , लाजवाब गजल लगी ,आपके शब्दो का चयन भी बेजतरीन लगा ।

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  4. वाकई लाजबाब हमें भी हमारे कॉलेज के दिन याद आ गये। :)

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  5. बहुत पसंद आई...अभी भी लिखा करिये!

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  6. मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
    बस इतना मुझको पयाम दे|
    वाह बहुत सुन्दर कविता है । पुरानी चीज़ें नई से अधिक अच्छी लगती हैं । शुभकामनायें

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  7. नही शिकवा है इस बात का
    तेरा साथ मुझको न मिल सका
    मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
    बस इतना मुझको पयाम दे|


    बहुत सुंदर रचना, और भी लिखियेगा.

    रामराम.

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  8. तूँ न आये कोई गिला नही
    मगर अपना हसीन ख्याल दे
    मेरी शाम धुंध में कट गयी
    मेरी रात को तो संवार दे|

    क्या बात है , बहुत सुन्दर !

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  9. सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है।

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  10. तूँ न आये कोई गिला नही
    मगर अपना हसीन ख्याल दे
    मेरी शाम धुंध में कट गयी
    मेरी रात को तो संवार दे|

    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  11. बहुत सुन्दर!

    पिलानी में किसी सहपाठिनी ने हमें जरा भी घास डाली होती तो हम भी अपना दिल उंडेलने की कविता लिख पाते!

    पता नहीं आपकी जवानी कैसी रही - हमारी तो रही सपाट और बन्जर! :-(

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  12. @ज्ञान सर ,बहुत सटीक आकलन है आपका,आभार.

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  13. बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति..उम्दा रचना...बधाई
    ______________________
    शब्द-शिखर पर इस बार काला-पानी कहे जाने वाले "सेलुलर जेल" की यात्रा करें और आपने भावों से परिचित भी कराएँ.

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  14. 'मेरे गम जो हैं ,वो रहेंगे भी
    मेरी उम्र कम हो दुआ करो'
    --
    'मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
    बस इतना मुझको पयाम दे|'

    वाह!वाह!!
    क्या खूब शायरी लिखा करते थे आप! बहुत सुंदर !

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  15. achcha laga sir padhkar. bhavnayen shabdon me poori ravani ke sath utaree hain.

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  16. नही शिकवा है इस बात का
    तेरा साथ मुझको न मिल सका
    मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
    बस इतना मुझको पयाम दे|
    blog jagat mein ab tak ki sabse behtareen panktiyan meri nazar mein. Dil se Badhai!!

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  17. सुन्दर रचना है शिकायत ये है की अब आप अपनी रचनाएँ कम पढवाते हैं और दूसरों की ज्यादा जरा गौर कीजियेगा

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  18. मेरे गम जो हैं ,वो रहेंगे भी
    मेरी उम्र कम हो दुआ करो
    अभी हूँ मै कल कभी ना रहूँ
    मुझे लमहे भर का करार दे .....

    बहुत ही लाजवाब कविता ....... बहुत खूबसूरत लिखा है ......

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  19. क्या खूब गजल की लय सधी गयी है .. '' तेरा जाम लेने को बज्म
    में , कोई और हाँथ बढ़ा न दे '' .. गजल सुनी थी .. उसका स्मरण
    हो गया ..
    ज्ञान जी की बात में दम है , चाहे जो हो ......... :)

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  20. सुन्दर ग़ज़ल कही पंडितजी।

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  21. बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने ! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

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  22. जनाब !
    मिश्रा जी,
    पहली दफा आपके ''मिजाज'' से दो चार हो रहा हूँ और कबूल्ता हूँ की बेहतरी से वंचित रहे , खैर देर आये पर दुरूस्त आये !
    बड़े तफ्शील से आपकी सभी रचनाये देखि , अच्छा महसूस हुआ /
    ''पयाम दे '' एक सरल सी दिलचस्प कविता लगी जो निहायत ही मुश्किल हुए जा रहे लम्हों को मुनासिब तमीज से जीने की ख्वाहिश रखते बन्दे की एक इकलौती आखिरी कोशिश मालूम देती है / असल में सब का सब तो खेल भरोसे का ही है , क्यों आप क्या कहते है !!!

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  23. इतनी पुरानी रचना लेकिन असर अब तक बरकरार...वाह...आनंद आ गया...
    नीरज

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  24. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!

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  25. अब ज्ञान जी वाली शिकायत तो मैं नहीं कर सका, पर आपने दिलेरी से स्वीकारा, इसके लिए आपको साधुवाद.

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  26. यहाँ ब्लॉगवुड अपना ब्लॉग दर्ज करवाएं। मुझे खुशी हो गई, शायद आपको भी।

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  27. मेरी शाम धुंध में कट गयी
    मेरी रात को तो संवार दे|

    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  28. नही शिकवा है इस बात का
    तेरा साथ मुझको न मिल सका
    मेरा ख्याल तेरे जेहन में है
    बस इतना मुझको पयाम दे|


    बहुत सुन्दर!

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  29. वाह!वाह!! बहुत सुन्दर! सुन्दर ग़ज़ल ---- बेहतरी से एक सरल सी दिलचस्प बहुत ही लाजवाब कविता/गजल लिखी है ...... /***

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