रविवार, 31 मई 2009

अलबेला है जमैथा का खरबूजा .

22 टिप्‍पणियां:

  1. बधाई -जम्मैथा तो छा गया

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन.....बहुत बहुत बधाई ....!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. लो जम्मैथा खरबूजा आ गया .बधाई मिश्र जी

    उत्तर देंहटाएं
  4. जमैथा के खरबूज की खुशबू तो यहाँ तक आ रही है...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बधाई!
    आप को आलेख सीधे अखबारों को भी प्रेषित करने चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  6. bahut bahut badhai...blog post ka samaachaar patra mein aanaa khushee kee baat hai..

    उत्तर देंहटाएं
  7. बधाई जी बधाई ..छा गये जी जमैथा के खरबूजे तो.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाकई अलबेला है "जमैथा का खरबूजा "। ये दिल्ली तक पहुंचेगा ,इसमे कोई शक नही था !!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाकई कमाल का है जमैथा का खरबूज.....समाचार पात्र में भी आ गया..............बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. मनोज जी सिर्फ पढ़वाने से काम नहीं चलेगा हमारे लिये तो भिजवाइये वर्ना रंग कैसे बदलेंगें भाई...

    उत्तर देंहटाएं
  11. जमैथा का खरबूज तो अब बहुत महंगा हो गया होगा आप के इस लेख ने उसे विशव मै प्रसिद्ध कर दिया, जल्द से दो चार खरबुजे अब भेज ही दो.

    उत्तर देंहटाएं
  12. पण्डितजी सर्वप्रथम तो २८ मई के खरबूजे वाले आलेख के लिए आपका बहुत बहुत आभार। जानकारियाँ अत्यंत रोचक थीं। बाद इसके अमर उजाला में लेख छपने की बहुत बहुत बधाई। प्रिंट मीडिया को भी अपना दोस्त बनाने का अब समय आ रहा है ऐसा लगता है। हम सबको मिलकर इस बारे में कुछ क़दम उठाने चाहिये शायद। आपकी क्या राय है सर ? अमर उजाला को हमारी ओर से धन्यवाद भी प्रेषित कीजिएगा। आपका मित्र।

    उत्तर देंहटाएं
  13. जमैथा के खरबूज की चर्चा तो सुनी थी पर आपने तो उसे विश्व-प्रसिद्ध बना दिया..बधाई !!
    _______________
    विश्व पर्यावरण दिवस(५ जून) पर "शब्द-सृजन की ओर" पर मेरी कविता "ई- पार्क" का आनंद उठायें और अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएँ !!

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ मेरे ब्लॉग जीवन लिए प्राण वायु से कमतर नहीं ,आपका अग्रिम आभार एवं स्वागत !